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आज की नारी ।

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै अपने दम से जीती हूँ हर मुश्किल को हरा मै आज की नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना लोहा मनवाया जो काम मर्द करते आये हर काम वो करके दिखलाया सीमा से हिमालय तक औऱ खेल मैदानों तक हर जगह अपना लोहा मनवाया मै माता,बहन और पुत्री हूँ मैं लेखक और कवयित्री हूँ अपने भुजबल से जीती हूँ बिजनेस लेडी, व्यापारी हूँ मैं आज की नारी हूँ जिस युग में नर-नारी कदम मिला चलते होंगे मै उस भविष्य स्वर्णिम युग की एक आशा की चिंगारी हूँ मैं आज की नारी हूँ

मोहब्बत की अलमारी..।

बहुत दिनों के बाद,तुम्हारी मोहब्बत की अलमारी खोली,और मिला तुम्हारी खुशबू से। तुम्हारी उन ज़िद्दी सरारतो से,तुम्हारी बातो की उन गहराईयो से, तुम्हारे यूँ बिन बताये रुठ जाने के तरीको से, तुम्हारे बदन की उस खुशबू से, जिन्हें जनता हूँ, मैं तुमसे भी बेहतर । क्योंकि वो रहती हैं हमेशा मेरे साथ ,तुम्हारे जाने के बाद भी । अगली दफा जब मिलूंगा तुमसे , तुम्हारी यादो की उस खुशबू को, एक छोटे बक्से मैं बांध लूंगा । ले जाऊंगा अपने साथ, हर रोज मिलूंगा तुमसे थोड़ा थोड़ा.. हर दफा पाऊंगा तुझको थोड़ा थोड़ा.. हर पल मोहब्बत होगी तमसे थोड़ा थोड़ा..                                Love you थोड़ा थोड़ा..