आज की नारी ।

मै अबला नादान नहीं हूँ
दबी हुई पहचान नहीं हूँ
मै अपने दम से जीती हूँ
हर मुश्किल को हरा
मै आज की नारी हूँ

पुरुष प्रधान जगत में मैंने
अपना लोहा मनवाया
जो काम मर्द करते आये
हर काम वो करके दिखलाया
सीमा से हिमालय तक
औऱ खेल मैदानों तक
हर जगह अपना लोहा मनवाया
मै माता,बहन और पुत्री हूँ
मैं लेखक और कवयित्री हूँ
अपने भुजबल से जीती हूँ
बिजनेस लेडी, व्यापारी हूँ
मैं आज की नारी हूँ

जिस युग में नर-नारी
कदम मिला चलते होंगे
मै उस भविष्य स्वर्णिम युग की
एक आशा की चिंगारी हूँ
मैं आज की नारी हूँ

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